बिहार के पूर्णिया सहित पूरे सीमांचल और कोसी क्षेत्र में इन दिनों अपराध का एक नया और संगठित रूप सामने आया है। ग्रामीण इलाकों में सक्रिय एक कथित ‘बकरी माफिया’ ने पुलिस और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। यह कोई सामान्य चोरी की घटना नहीं, बल्कि कई जिलों में फैले एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, इस गिरोह का नेटवर्क सीमांचल और कोसी के 7 से 8 जिलों तक फैल चुका है। आरोप है कि गैंग सुनियोजित तरीके से बकरियों की चोरी कर उन्हें दूसरे क्षेत्रों में बेचता है। इस अवैध कारोबार से हर महीने करीब 50 लाख रुपये की कमाई होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस नेटवर्क के सदस्य चोरी की वारदातों को अंजाम देने और माल की ढुलाई के लिए महंगी और लग्जरी गाड़ियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। फॉर्च्यूनर, क्रेटा, स्कॉर्पियो और हुंडई की एसयूवी जैसी गाड़ियां कथित तौर पर इस गिरोह की गतिविधियों में उपयोग की जा रही हैं, जिससे उन पर आसानी से संदेह भी नहीं होता।
ग्रामीणों का कहना है कि बीते कुछ महीनों में बकरी चोरी की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हुई है। कई गांवों में रात के समय पशुपालकों को नुकसान उठाना पड़ा है। मामले को लेकर स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी सतर्क हो गई है तथा गिरोह के नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है।
सीमांचल और कोसी क्षेत्र में तेजी से फैलते इस कथित ‘बकरी माफिया’ के कारोबार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालकों की आजीविका के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब लोगों की निगाहें पुलिस कार्रवाई और इस संगठित नेटवर्क के पर्दाफाश पर टिकी हैं।
नोट: खबर में प्रकाशित की गई तस्वीर सांकेतिक है और एआई से जेनरेट की गई है।