पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। राज्य पुलिस ने उन्हें एक्स (X) श्रेणी की सुरक्षा प्रदान करने का निर्णय लिया है। सूत्रों के अनुसार यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों द्वारा किए गए ताजा सुरक्षा आकलन के आधार पर यह फैसला लिया गया है। नई व्यवस्था के तहत अभिषेक बनर्जी के साथ हर समय तीन प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मी तैनात रहेंगे, जो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।
गौरतलब है कि पूर्व में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान अभिषेक बनर्जी को जेड प्लस (Z+) श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त थी। हालांकि सत्ता परिवर्तन के बाद उनकी सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया गया था और विशेष सुरक्षा कवच हटा लिया गया था। अब राज्य पुलिस द्वारा उन्हें पुनः सुरक्षा प्रदान किए जाने को राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के घटनाक्रमों और सुरक्षा संबंधी इनपुट्स को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। हालांकि राज्य सरकार या पुलिस विभाग की ओर से इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक बयान अभी सामने नहीं आया है।
भारत में सुरक्षा श्रेणियां क्या होती हैं?
देश में विशिष्ट व्यक्तियों, जनप्रतिनिधियों, न्यायाधीशों, अधिकारियों और अन्य महत्वपूर्ण लोगों को खतरे के स्तर के अनुसार विभिन्न श्रेणियों की सुरक्षा प्रदान की जाती है।
X श्रेणी सुरक्षा
- आमतौर पर 2 से 3 सुरक्षा कर्मी तैनात किए जाते हैं।
- कम स्तर के संभावित खतरे को देखते हुए दी जाती है।
Y श्रेणी सुरक्षा
- लगभग 8 से 11 सुरक्षा कर्मी शामिल होते हैं।
- इनमें व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी (PSO) भी शामिल हो सकते हैं।
Y+ श्रेणी सुरक्षा
- Y श्रेणी से अधिक सुरक्षा।
- अतिरिक्त सशस्त्र सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जाती है।
Z श्रेणी सुरक्षा
- करीब 20 से 22 सुरक्षा कर्मियों का सुरक्षा घेरा।
- एस्कॉर्ट वाहन और अन्य सुरक्षा संसाधन भी उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
Z+ श्रेणी सुरक्षा
- लगभग 50 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती।
- यह वीवीआईपी स्तर की सुरक्षा मानी जाती है।
SPG सुरक्षा
- देश के प्रधानमंत्री और कुछ विशेष परिस्थितियों में पूर्व प्रधानमंत्रियों तथा उनके परिवारों को प्रदान की जाने वाली सर्वोच्च सुरक्षा व्यवस्था।
- इसका जिम्मा Special Protection Group के पास होता है।
सुरक्षा श्रेणी का निर्धारण संबंधित एजेंसियों द्वारा खतरे के आकलन (Threat Perception Assessment) के आधार पर किया जाता है और समय-समय पर इसकी समीक्षा भी की जाती है।