बिना जमीन और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के दिए गए ठेके, तकनीकी समिति का गठन नहीं, 35 परियोजनाएं रद्द, 23 योजनाओं में ₹31.06 करोड़ की लागत बढ़ी
रांची। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में झारखंड स्टेट बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन लिमिटेड के वित्तीय प्रबंधन और परियोजना क्रियान्वयन में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, JSBCCL ने कई परियोजनाओं में बिना भूमि उपलब्ध हुए, बिना विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR), साइट-विशिष्ट ड्राइंग एवं डिजाइन तथा तकनीकी जांच के करोड़ों रुपये की योजनाओं पर कार्य शुरू कर दिया। इसके कारण अनेक परियोजनाएं वर्षों तक अधूरी रहीं, कई योजनाएं रद्द करनी पड़ीं और सरकारी धन निष्क्रिय पड़ा रहा।
CAG रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2019-20 के दौरान पांच सरकारी विभागों ने 24 परियोजनाओं के लिए ₹60.95 करोड़ JSBCCL को उपलब्ध कराए थे। यह राशि कंपनी के पर्सनल लेजर (PL) खाते में जमा रही, लेकिन भूमि उपलब्ध नहीं होने और आवश्यक दस्तावेज समय पर नहीं मिलने के कारण परियोजनाओं पर काम शुरू नहीं हो सका। मार्च 2023 तक यह राशि खर्च नहीं हुई और न ही संबंधित विभागों को वापस लौटाई गई, जबकि झारखंड ट्रेजरी कोड के तहत ऐसी राशि निर्धारित अवधि के बाद वापस की जानी चाहिए थी।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि वित्तीय वर्ष 2018-19 से 2022-23 तक JSBCCL ने न तो कॉरपोरेट बजट तैयार किया और न ही तकनीकी समिति (Technical Committee) का गठन किया। इसके बावजूद केवल मॉडल एस्टीमेट के आधार पर परियोजनाओं को तकनीकी स्वीकृति देकर कार्य शुरू करा दिया गया। वास्तविक स्थल की परिस्थितियों के अनुरूप विस्तृत अनुमान और तकनीकी परीक्षण नहीं किए गए।
CAG ने पाया कि झारखंड लोक निर्माण विभाग (JPWD) कोड के प्रावधानों की अनदेखी करते हुए JSBCCL ने बिना भूमि उपलब्ध हुए 35 परियोजनाओं के लिए ₹102.54 करोड़ के ठेके जारी कर दिए। बाद में इनमें से 33 परियोजनाएं भूमि नहीं मिलने और दो परियोजनाएं भूमि मिलने में देरी के कारण रद्द करनी पड़ीं। इनमें से 14 परियोजनाओं के लिए संबंधित विभागों द्वारा ₹42.45 करोड़ भी जारी किए जा चुके थे।
रिपोर्ट के अनुसार, सात विभागों द्वारा स्वीकृत 31 परियोजनाओं—जिनमें डिग्री कॉलेज, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), छात्रावास, कोल्ड स्टोरेज और बहुउद्देशीय परीक्षा भवन शामिल हैं—के लिए ₹293.85 करोड़ के अनुबंध किए गए, जबकि विस्तृत ड्राइंग एवं डिजाइन उपलब्ध नहीं थे। परिणामस्वरूप 25 परियोजनाएं चार से 54 महीने की देरी से पूरी हुईं, जबकि तीन परियोजनाएं जुलाई 2024 तक भी अधूरी थीं।
CAG ने यह भी दर्ज किया कि विस्तृत और साइट-विशिष्ट अनुमान नहीं होने के कारण 23 परियोजनाओं में ₹31.06 करोड़ की लागत वृद्धि (Cost Overrun) हुई। निर्माण के दौरान डिजाइन और कार्य में बदलाव के कारण सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा।
रिपोर्ट में डिग्री कॉलेज निर्माण परियोजना का भी विशेष उल्लेख किया गया है। JSBCCL ने 27 डिग्री कॉलेजों के लिए ₹15.77 करोड़ प्रति कॉलेज का एक समान मॉडल एस्टीमेट तैयार किया, जिसके आधार पर प्रशासनिक स्वीकृति दी गई। बाद में वास्तविक परिस्थितियों के अनुसार डिजाइन तैयार करने के कारण कई परियोजनाओं में देरी हुई। छह कॉलेजों का निर्माण निर्धारित समय से 22 से 34 महीने की देरी से भी पूरा नहीं हो सका, जबकि एक कॉलेज का निर्माण वन भूमि संबंधी अनुमति नहीं मिलने के कारण शुरू ही नहीं हो पाया।
CAG ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि JSBCCL ने परियोजनाओं की तकनीकी एवं आर्थिक व्यवहार्यता का समुचित परीक्षण किए बिना ही कार्य प्रारंभ कर दिया, जो वित्तीय अनुशासन और परियोजना प्रबंधन की गंभीर कमी को दर्शाता है।
अपनी प्रतिक्रिया में विभाग ने स्वीकार किया कि अधिकांश योजनाएं भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण प्रभावित हुईं। विभाग ने यह भी कहा कि भविष्य में भूमि उपलब्ध होने के बाद ही निविदाएं आमंत्रित की जाएंगी तथा वास्तविक स्थल के अनुसार ड्राइंग एवं डिजाइन तैयार किए जाएंगे।
हालांकि, CAG ने स्पष्ट किया कि बिना भूमि उपलब्ध कराए, बिना विस्तृत तकनीकी स्वीकृति और बिना तकनीकी समिति की समीक्षा के कार्य शुरू करना JPWD Code और वित्तीय नियमों के विपरीत था, जिसके कारण सरकारी धन के उपयोग में गंभीर लापरवाही और परियोजना प्रबंधन की खामियां उजागर हुईं।
(स्रोत: नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की प्रदर्शन लेखा परीक्षा रिपोर्ट 5, 2025)