गुवाहाटी, 16 सितंबर: असम के सरकारी और प्रांतीयकृत कॉलेजों तथा उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए अब कम से कम 70 प्रतिशत उपस्थिति जरूरी होगी। राज्य के शिक्षा मंत्री डॉ. रानोज पेगू ने बुधवार को स्पष्ट किया कि निर्धारित उपस्थिति पूरी नहीं करने वाले छात्रों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित किया जा सकता है।
यह नियम फीस माफी, निजुत मोइना और निजुत बाबू जैसी राज्य सरकार की योजनाओं पर लागू होगा। मंत्री ने कहा कि जिन छात्रों की उपस्थिति 70 प्रतिशत से कम होगी, उन्हें संबंधित योजनाओं से हटाया जा सकता है।
हालांकि, विशेष परिस्थितियों में छात्रों को राहत दी जा सकती है। डॉ. पेगू के अनुसार, प्राकृतिक आपदा, स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति या परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु जैसी वास्तविक और गंभीर परिस्थितियों में कॉलेज या संस्थान के प्राचार्य उपस्थिति में छूट दे सकते हैं।
शिक्षा मंत्री ने यह भी साफ किया कि सरकार की फिलहाल 70 प्रतिशत उपस्थिति की अनिवार्यता कम करने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कॉलेजों और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के प्राचार्यों से नियमित कक्षाएं संचालित करने को कहा। मंत्री ने चेतावनी दी कि कक्षाओं में कम उपस्थिति से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है और शैक्षणिक असफलता की स्थिति में सरकारी योजनाओं का लाभ भी प्रभावित हो सकता है।
डॉ. पेगू ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन छात्रों के कुछ विषयों में बैकलॉग हैं, वे निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार 50 प्रतिशत फीस माफी का लाभ लेते रह सकते हैं।
शिक्षा मंत्री ने ये बातें अनुसूचित जनजाति (एसटी) के छात्रों के बीच राष्ट्रीय पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति वितरित करने के लिए आयोजित कार्यक्रम के दौरान कहीं। कार्यक्रम में शैक्षणिक सत्र 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के लिए कुल 1,66,124 छात्रों को 194.55 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की गई।