तमिलनाडु के बहुचर्चित सथानकुलम कस्टोडियल डेथ मामले में मदुरै की सत्र अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए नौ पुलिसकर्मियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने इस प्रकरण को ‘दुर्लभतम’ श्रेणी में रखते हुए सभी दोषियों पर कुल मिलाकर एक करोड़ चालीस लाख रुपये से अधिक का आर्थिक दंड भी लगाया है। यह मामला वर्ष 2020 में सामने आया था, जिसने पूरे देश में गहरी चिंता और आक्रोश पैदा किया था।
घटना जून 2020 की है, जब तूतीकोरिन जिले के सथानकुलम थाना क्षेत्र में लॉकडाउन के दौरान दुकान देर तक खुली रखने के आरोप में स्थानीय व्यापारी पी. जयराज और उनके पुत्र जे. बेनिक्स को पुलिस हिरासत में लिया गया था। आरोप है कि हिरासत के दौरान दोनों के साथ अमानवीय व्यवहार और मारपीट की गई। बाद में उन्हें कोविलपट्टी जेल भेजा गया, जहां 22 जून की रात बेनिक्स की तबीयत बिगड़ने के बाद उनकी मृत्यु हो गई। अगले ही दिन जयराज ने भी दम तोड़ दिया।
इस घटना ने राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। बाद में जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी गई। विस्तृत जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर और कांस्टेबल स्तर के कुल नौ पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया।
फैसला सुनाते हुए अदालत ने टिप्पणी की कि कानून की रक्षा का दायित्व जिन पर है, यदि वही कानून का उल्लंघन करें और मानवाधिकारों का हनन करें, तो यह समाज के लिए अत्यंत गंभीर विषय है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की बर्बरता को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। यह निर्णय पुलिस हिरासत में होने वाली यातनाओं के खिलाफ एक सशक्त न्यायिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला जवाबदेही और मानवाधिकार संरक्षण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।