एक छोटे से प्रवासी पक्षी ने अपनी अद्भुत उड़ान से दुनिया को फिर चौंका दिया है। युवा मादा अमूर फाल्कन “अलांग” ने सोमालिया के तट से उड़ान भरते हुए महज 60 घंटों में लगभग 3,300 किलोमीटर की लगातार उड़ान पूरी की है। यह सफर उसने बिना रुके अरब सागर और रेगिस्तानी इलाकों के ऊपर से तय किया है।
अमूर फाल्कन सैटेलाइट ट्रैकिंग परियोजना के अनुसार, अलांग ने 14 मई को सोमालिया के तट से अपनी ऐतिहासिक यात्रा शुरू की थी। इसके बाद वह लगातार खुले समुद्र और रेगिस्तानी आसमान के ऊपर उड़ती रही। विशेषज्ञों के मुताबिक, अलांग ने कराची से लगभग 150 किलोमीटर पूर्व में थोड़ी देर के लिए विश्राम किया और रविवार सुबह करीब 6 बजे फिर उड़ान भर ली। अनुमान है कि वह दिन में आगे चलकर राजस्थान में प्रवेश कर सकती है।
यह सैटेलाइट ट्रैकिंग परियोजना फिलहाल तीन अमूर फाल्कन — अलांग, अपापांग और आहू — की निगरानी कर रही है। इन पक्षियों की यात्राएं वैज्ञानिकों और वन्यजीव विशेषज्ञों को लगातार हैरान कर रही हैं।
कुछ ही दिन पहले, 5 मई 2026 को “अपापांग” नामक अमूर फाल्कन ने भी एक रिकॉर्ड जैसी उड़ान पूरी की थी। उसने सोमालिया से भारत तक लगभग 4,750 किलोमीटर की दूरी करीब 95 घंटों में बिना रुके तय की थी। अब विशेषज्ञों और पक्षी प्रेमियों की निगाहें तीसरे फाल्कन “आहू” पर टिकी हुई हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन पक्षियों की यात्राएं केवल रोमांचक नहीं हैं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। सैटेलाइट ट्रैकिंग के जरिए शोधकर्ता यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि अमूर फाल्कन जैसे छोटे पक्षी हजारों किलोमीटर लंबी यात्राओं के दौरान दिशा, मौसम और ऊर्जा संतुलन को कैसे संभालते हैं।
परियोजना से जुड़े विशेषज्ञ डॉ. सुरेश ने इन पक्षियों की सहनशक्ति को “अविश्वसनीय” बताते हुए कहा कि उनकी यात्राएं प्रवासी पक्षियों के संरक्षण और उनके सुरक्षित प्रवास मार्गों की आवश्यकता को भी उजागर करती हैं।
अमूर फाल्कन दुनिया के सबसे लंबी दूरी तय करने वाले प्रवासी पक्षियों में गिने जाते हैं। ये पक्षी साइबेरिया से दक्षिणी अफ्रीका तक हर साल हजारों किलोमीटर का सफर करते हैं। भारत, विशेषकर पूर्वोत्तर भारत, इनके प्रवास मार्ग का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। अलांग और अपापांग की ये अद्भुत उड़ानें एक बार फिर साबित कर रही हैं कि छोटे पंख भी बड़ी दूरियां तय कर सकते हैं।