नीलांबर-पीतांबरपुर (पलामू): शारदीय नवरात्र के पांच दिन बीतने के साथ ही क्षेत्र में दुर्गापूजा की तैयारियां तेज हो गई हैं। विभिन्न पूजा पंडालों में मां दुर्गा समेत अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में मूर्तिकार जुटे हुए हैं। कहीं पुआल से प्रतिमाओं का ढांचा तैयार किया जा रहा है, तो कहीं मिट्टी की परतों से देवी-देवताओं की आकृतियां उकेरी जा रही हैं। प्रतिमाओं के आकार लेने के साथ ही पूजा पंडालों में उत्सव की रौनक बढ़ने लगी है।
मूर्तिकार पारंपरिक विधि से पुआल को बांधकर प्रतिमाओं का ढांचा तैयार करते हैं। इसके बाद उस पर मिट्टी की परत चढ़ाकर देवी-देवताओं का स्वरूप बनाया जाता है। मिट्टी सूखने के बाद रंगों और बारीक सजावट के माध्यम से प्रतिमाओं को आकर्षक रूप दिया जाता है। मां दुर्गा के साथ महिषासुर, भगवान गणेश, माता लक्ष्मी, माता सरस्वती, भगवान कार्तिकेय और उनके वाहन सिंह की प्रतिमाएं भी तैयार की जा रही हैं। कलाकारों की मेहनत, अनुभव और हुनर से मिट्टी की प्रतिमाएं धीरे-धीरे जीवंत रूप लेने लगती हैं।
कलाकारों के हुनर में दिखती है आस्था की झलक
प्रतिमा निर्माण में देवी-देवताओं के चेहरे की बनावट का विशेष महत्व होता है। मूर्तिकार सांचों और पारंपरिक तकनीकों की मदद से प्रतिमाओं को विशिष्ट स्वरूप देते हैं। इसके बाद आंखों की बारीक रेखाओं, रंगों, वस्त्रों और आभूषणों की सजावट से प्रतिमाओं की सुंदरता निखारी जाती है। यह कला केवल शिल्पकला तक सीमित नहीं है, बल्कि कलाकारों की वर्षों की साधना, अनुभव और धार्मिक आस्था का भी प्रतीक है।
एक ओर मूर्तिकार प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर पूजा समितियां भी तैयारियों को गति दे रही हैं। पंडालों की सजावट, बिजली और रोशनी की व्यवस्था, पूजन सामग्री की खरीदारी तथा अन्य जरूरी तैयारियां की जा रही हैं। शुभ मुहूर्त में विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना शुरू होने को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह देखा जा रहा है।
पूजा के साथ गांव के बाजार को भी मिलेगी रफ्तार
दुर्गापूजा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने वाला महत्वपूर्ण अवसर भी है। पूजा के दौरान फूल-माला, वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, प्रसाद और पूजन सामग्री की मांग बढ़ जाती है। इससे स्थानीय दुकानदारों, फूल विक्रेताओं, कारीगरों और छोटे कारोबारियों को कारोबार बढ़ने की उम्मीद रहती है।
दुर्गापूजा के अवसर पर लगने वाले मेलों में मिठाइयों, खिलौनों, घरेलू उपयोग की वस्तुओं और सजावटी सामान की दुकानें सजती हैं। बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले और अन्य आकर्षण भी लगाए जाते हैं। इन गतिविधियों से स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलता है और कई लोगों को अस्थायी रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं। इस तरह धार्मिक आयोजन सामाजिक मेलजोल के साथ-साथ स्थानीय बाजार की आर्थिक गतिविधियों को भी गति प्रदान करता है।
बच्चों से लेकर महिलाओं तक को रहता है मेले का इंतजार
दुर्गापूजा को लेकर गांवों में हर उम्र के लोगों के बीच उत्साह देखने को मिलता है। बच्चों के लिए खिलौने, झूले और मनोरंजन के साधन आकर्षण का केंद्र होते हैं, जबकि महिलाएं पूजा-अर्चना, देवी दर्शन और खरीदारी के लिए मेले में पहुंचती हैं। रंग-बिरंगे पंडाल, आकर्षक रोशनी और सामूहिक पूजा पूरे क्षेत्र को उत्सवी माहौल से भर देते हैं।
फिलहाल नीलांबर-पीतांबरपुर क्षेत्र के विभिन्न पूजा स्थलों पर तैयारियां जारी हैं। मूर्तिकार प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं, जबकि पूजा समितियां पंडाल निर्माण, सजावट और आयोजन की अन्य व्यवस्थाओं को पूरा करने में लगी हैं। आने वाले दिनों में प्रतिमाओं की सजावट और पंडालों का निर्माण पूरा होने के साथ ही क्षेत्र में दुर्गोत्सव की रौनक और बढ़ने की उम्मीद है।