दुनिया के कुछ देश ऐसे हैं जो अपने विशाल तेल और गैस भंडार के कारण न केवल घरेलू जरूरतें पूरी करते हैं बल्कि वैश्विक बाजार में बड़े निर्यातक भी हैं। दुनिया के अधिकांश देशों को अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कच्चे तेल (Crude Oil) और एलपीजी (LPG) का आयात करना पड़ता है। इसका मुख्य कारण यह है कि कई देशों की ऊर्जा खपत उनके उत्पादन से कहीं अधिक होती है। हालांकि कुछ देश ऐसे भी हैं जिनके पास तेल और गैस के विशाल भंडार हैं। ये देश अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ अतिरिक्त उत्पादन को अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात करते हैं, इसलिए इन्हें ऊर्जा के मामले में काफी हद तक आत्मनिर्भर माना जाता है।
वैश्विक आंकड़ों के अनुसार सऊदी अरब, रूस, संयुक्त अरब अमीरात, कनाडा और इराक जैसे देश दुनिया के प्रमुख कच्चे तेल निर्यातकों में शामिल हैं। (World’s Top Exports)
तेल आयात पर निर्भर नहीं रहने वाले प्रमुख देश
दुनिया में कुछ ऐसे देश हैं जो बड़े पैमाने पर तेल उत्पादन करते हैं और आमतौर पर आयात पर निर्भर नहीं रहते। इनमें प्रमुख देश शामिल हैं
- सऊदी अरब – दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातकों में से एक
- रूस – विशाल तेल और प्राकृतिक गैस भंडार वाला देश
- कुवैत – घरेलू खपत से कहीं अधिक तेल उत्पादन
- कतर – गैस और एलपीजी का बड़ा निर्यातक
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE) – कच्चे तेल और एलपीजी का प्रमुख उत्पादक
- इराक – बड़े तेल भंडार और निर्यात क्षमता
- ईरान – तेल और गैस उत्पादन में अग्रणी
- नॉर्वे – यूरोप का प्रमुख तेल उत्पादक देश
- कनाडा – ऑयल सैंड्स के कारण विशाल उत्पादन
- वेनेजुएला – दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक
- कजाखस्तान – मध्य एशिया का बड़ा तेल निर्यातक
- लीबिया – उत्तरी अफ्रीका का प्रमुख तेल उत्पादक
- अल्जीरिया – तेल और गैस दोनों का निर्यातक
- नाइजीरिया – अफ्रीका का प्रमुख तेल निर्यातक
- अंगोला – समुद्री तेल उत्पादन के लिए प्रसिद्ध
एलपीजी के बड़े निर्यातक देश
दुनिया में एलपीजी (पेट्रोलियम गैस) के निर्यात में भी कुछ देश अग्रणी हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
- कतर
- सऊदी अरब
- संयुक्त अरब अमीरात
- संयुक्त राज्य अमेरिका
- रूस
- अल्जीरिया
- कनाडा
ये देश ऊर्जा बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और कई आयातक देशों को गैस और तेल की आपूर्ति करते हैं।
पूरी तरह आयात-मुक्त होना दुर्लभ
विशेषज्ञों के अनुसार, पूरी तरह से तेल आयात न करने वाले देशों की संख्या बहुत कम है। कई बार तेल-समृद्ध देश भी अपने रिफाइनरी ढांचे या व्यापारिक कारणों से पेट्रोल या डीजल जैसे कुछ परिष्कृत उत्पादों का सीमित आयात करते हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में ऐसे देशों को आमतौर पर “नेट एक्सपोर्टर” या ऊर्जा आत्मनिर्भर देश कहा जाता है।
मध्य-पूर्व, अफ्रीका, यूरोप और उत्तरी अमेरिका के कुछ देश अपने विशाल तेल और गैस संसाधनों के कारण ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर हैं। ये देश न केवल अपनी घरेलू जरूरतें पूरी करते हैं बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता की भूमिका भी निभाते हैं।