मनातू, पलामू। शिव गुरु परंपरा की जनक दीदी नीलम आनंद की जन्मस्थली मनातू गढ़ स्थित देवी मंडप मैदान में शिव शिष्य परिवार के तत्वावधान में शिव गुरु महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। महोत्सव का उद्देश्य जगतगुरु भगवान शिव की शिष्यता के भाव से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ना रहा।
इस अवसर पर गुरु भाई अर्चित आनंद ने कहा कि श्रद्धा और विश्वास से ही भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। प्रत्येक गुरु भाई-बहन एवं जन-जन को भगवान शिव के गुरु स्वरूप को स्वीकार कर उनकी कृपा की अनुभूति करनी चाहिए। गुरु का कार्य सभी को शिव के सान्निध्य से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि श्रद्धेय श्रीगुरु हरिद्रानंद जी और मां नीलम दीदी ने शिव को गुरु मानने की भावना से समाज को जोड़ने का महान कार्य किया है।
कार्यक्रम में दीदी नीलम आनंद के जीवन पर भी प्रकाश डाला गया। उनका जन्म 27 जुलाई 1952 को नागपंचमी के दिन पलामू जिला के मनातू गढ़ में मौआर जगदीश्वरजीत सिंह एवं भूमिका देवी की द्वितीय पुत्री के रूप में हुआ था। 22 मई 1972 को उनका विवाह साहब श्री हरिद्रानंद जी के साथ संपन्न हुआ।
शिव शिष्या बहन बरखा आनंद ने अपने संबोधन में कहा,
“अप्रतिम भगवान शिव की शिष्यता ही प्रत्येक मानव के अभ्युदय का एकमात्र विकल्प है।” उन्होंने कहा कि भगवान शिव जगतगुरु हैं, इसलिए जाति, धर्म, संप्रदाय या लिंग से परे हर व्यक्ति शिव को अपना गुरु बना सकता है। शिव की शिष्यता के लिए किसी औपचारिक दीक्षा की आवश्यकता नहीं है, बल्कि “शिव मेरे गुरु हैं” यह भाव ही शिष्यता का आरंभ है।
महोत्सव के दौरान स्वर्गीय दीदी नीलम आनंद की स्मृति में मनातू में स्मृति भवन निर्माण का निर्णय लिया गया। इसके लिए उनके भाइयों सचिंद्रजीत सिंह एवं छोटू मौआर बै ने भूमि दान देने की घोषणा की।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिव शिष्यों की उपस्थिति रही। आगंतुकों का स्वागत श्री आलोक कुमार ने किया, जबकि आभार व्यक्त करते हुए समापन श्री सचिनजीत सिंह ने किया। अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। इस आयोजन को सफल बनाने में पलामू जिला के समस्त गुरु भाई-बहनों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।