रिपोर्ट -पंकज गिरि, छिपादोहर
चतरा लोकसभा क्षेत्र के सांसद कालीचरण सिंह ने संसद के मानसून सत्र में नियम 377 के तहत लातेहार जिले के छिपादोहर एवं हेहेगड़ा रेलवे स्टेशनों को हटाने अथवा विस्थापित करने के प्रस्ताव का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय का ध्यान इस विषय की ओर आकर्षित करते हुए स्थानीय जनता के हितों की रक्षा करने की मांग की।
सांसद ने कहा कि छिपादोहर और हेहेगड़ा रेलवे स्टेशन पलामू टाइगर रिजर्व एवं वनांचल क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों, आदिवासी परिवारों, विद्यार्थियों, किसानों, मजदूरों, मरीजों और छोटे व्यापारियों के लिए आवागमन का प्रमुख साधन हैं। इन स्टेशनों के विस्थापन से क्षेत्र की बड़ी आबादी को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
उन्होंने केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय से आग्रह किया कि दोनों रेलवे स्टेशनों को हटाने या विस्थापित करने के किसी भी प्रस्ताव को तत्काल निरस्त किया जाए। साथ ही स्टेशनों का आधुनिकीकरण, यात्री सुविधाओं का विस्तार तथा अधिक ट्रेनों के ठहराव की व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की।
सांसद कालीचरण सिंह ने कहा कि औद्योगिक विकास आवश्यक है, लेकिन जनहित और पर्यावरण, विशेषकर वन एवं वन्यजीव संरक्षण के साथ किसी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। संसद में इस मुद्दे को उठाए जाने पर क्षेत्र के लोगों ने सांसद के प्रति आभार व्यक्त किया है।
गौरतलब है कि सोननगर से पतरातू तक प्रस्तावित रेलवे फ्रेट कॉरिडोर के तहत तीसरी रेल लाइन बिछाने का कार्य चल रहा है। इसी परियोजना के अंतर्गत पलामू टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र से गुजरने वाले छिपादोहर और हेहेगड़ा रेलवे स्टेशनों को विस्थापित कर बेतला राष्ट्रीय उद्यान के अति संवेदनशील वन क्षेत्र लेदगाईं, कुचिला और मतनाग के रास्ते नई रेल लाइन ले जाने का प्रस्ताव सामने आया है, जिसे वन विभाग की सहमति प्राप्त होने की बात कही जा रही है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रस्ताव से बेतला राष्ट्रीय उद्यान और पलामू टाइगर रिजर्व के घने जंगलों तथा वन्यजीवों के अस्तित्व पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। उनका दावा है कि नए सर्वे वाले क्षेत्र में पहले से ही मानव-वन्यजीव संघर्ष की अनेक घटनाएं हो चुकी हैं और इन्हीं इलाकों में वन विभाग द्वारा सर्वाधिक मुआवजा भी दिया गया है। ग्रामीणों ने यह भी उल्लेख किया कि इसी वर्ष बेतला राष्ट्रीय उद्यान में बाघ की मौजूदगी की पुष्टि हुई थी।
ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री कार्यालय, रेल बोर्ड, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण, राष्ट्रीय वन्यजीव संस्थान, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (रांची) सहित संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपकर इस परियोजना पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उनका कहना है कि नई रेल परियोजना को मंजूरी देने से पहले विस्तृत पर्यावरण प्रभाव आकलन कराया जाए तथा पर्यावरणविदों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। साथ ही पर्यावरण और जनहित के मद्देनजर प्रस्तावित विस्थापन पर तत्काल रोक लगाने की मांग भी की गई है।