रांची, 21 मई : परिवार और उसकी जिम्मेदारियां हर किसी को मजबूर कर देती हैं। जब बात एक मां की होती है तब वह अपने बच्चे के भविष्य के लिए हर कुछ कुर्बान करती है। झारखंड पुलिस मुख्यालय में बुधवार को उस वक्त भावुक दृश्य देखने को मिला, जब एक महिला नक्सली अपनी गोद में सात महीने के बच्चे को लेकर सरेंडर करने पहुंची। महिला नक्सली शांति उर्फ वंदना ने अपने पति बिंज हांसदा उर्फ दर्शन के साथ आत्मसमर्पण किया।

सरेंडर कार्यक्रम के दौरान मंच पर पहुंची शांति के एक हाथ में बच्चा था, जबकि दूसरे हाथ से वह पुलिस अधिकारियों से गुलदस्ता ले रही थी। बच्चा मां के कंधे पर आराम से सो रहा था। यह दृश्य देखते ही वहां मौजूद सभी लोगों और मीडिया का ध्यान उसकी ओर चला गया। पुलिस अधिकारियों ने मुस्कुराकर मां और बच्चे का स्वागत किया।

झारखंड पुलिस ने इस अभियान को “ऑपरेशन नवजीवन” नाम दिया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बच्चा होने के बाद शांति और उसके पति ने माओवादी संगठन छोड़ने का फैसला किया। दोनों अपने बच्चे के भविष्य को लेकर चिंतित थे और सामान्य जिंदगी जीना चाहते थे।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि दंपती ने खुद पुलिस से संपर्क किया था। पुलिस ने सरेंडर को किसी अपराधी की तरह नहीं बल्कि नई जिंदगी की शुरुआत के रूप में पेश करने की कोशिश की। इसी वजह से सरेंडर करने वाले माओवादियों के परिजनों को भी कार्यक्रम में शामिल किया गया।
इस दौरान कुल 25 उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें 23 भाकपा-माओवादी और दो जेजेएमपी के सदस्य शामिल थे। कई इनामी माओवादी भी इसमें शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, सरेंडर करने वालों में छह सब-जोनल कमांडर, छह एरिया कमांडर और 13 हार्डकोर माओवादी शामिल हैं।
पुलिस ने इनके पास से इंसास एलएमजी, इंसास राइफल, एसएलआर और बड़ी मात्रा में गोलियां बरामद की हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस सरेंडर के बाद कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में सक्रिय माओवादियों की संख्या काफी कम हो गई है।