भारत की भूमि मंदिरों की अद्भुत परंपरा से समृद्ध है। ये मंदिर न केवल धार्मिक आस्था के केंद्र हैं, बल्कि प्राचीन भारतीय स्थापत्य, शिल्प और इंजीनियरिंग कौशल के जीवंत प्रमाण भी हैं। प्रस्तुत है भारत के 10 प्रमुख प्राचीन मंदिरों पर आधारित विशेष समाचार रिपोर्ट, जिनमें उनके स्थापत्य और निर्माण से जुड़ी ऐतिहासिक जानकारियाँ शामिल हैं।
1. बृहदेश्वर मंदिर, तंजावुर (तमिलनाडु)
11वीं शताब्दी में चोल सम्राट राजराज चोल प्रथम द्वारा निर्मित यह मंदिर द्रविड़ स्थापत्य का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसका विशाल विमान (शिखर) ग्रेनाइट पत्थरों से बना है, जो उस समय की उन्नत इंजीनियरिंग को दर्शाता है।

2. कोणार्क सूर्य मंदिर, ओडिशा
13वीं शताब्दी में पूर्वी गंग वंश के राजा नरसिंहदेव प्रथम द्वारा निर्मित यह मंदिर रथ के आकार में बना है। इसकी स्थापत्य शैली कलिंग वास्तुकला पर आधारित है।

3. कंदरिया महादेव मंदिर, खजुराहो (मध्य प्रदेश)
चंदेल वंश द्वारा 11वीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर नागर शैली का श्रेष्ठ उदाहरण है। मंदिर की दीवारों पर सूक्ष्म मूर्तिकला इसकी पहचान है।

4. मीनाक्षी अम्मन मंदिर, मदुरै (तमिलनाडु)
यह मंदिर द्रविड़ शैली में निर्मित है और पांड्य तथा नायक शासकों के काल में विकसित हुआ। इसके रंगीन गोपुरम स्थापत्य की विशेषता हैं।

5. जगन्नाथ मंदिर, पुरी (ओडिशा)
12वीं शताब्दी में राजा अनंतवर्मन चोडगंगदेव द्वारा निर्मित यह मंदिर कलिंग स्थापत्य शैली में बना है।

6. सोमनाथ मंदिर, गुजरात
चालुक्य स्थापत्य शैली में निर्मित यह मंदिर कई बार पुनर्निर्मित हुआ। वर्तमान संरचना प्राचीन शैली पर आधारित है।

7. विरुपाक्ष मंदिर, हम्पी (कर्नाटक)
विजयनगर साम्राज्य के काल में विकसित यह मंदिर द्रविड़ स्थापत्य का उत्कृष्ट उदाहरण है।

8. लिंगराज मंदिर, भुवनेश्वर (ओडिशा)
11वीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर कलिंग शैली का परिपक्व रूप प्रस्तुत करता है।

9. कैलाशनाथ मंदिर, एलोरा (महाराष्ट्र)
राष्ट्रकूट शासक कृष्ण प्रथम द्वारा 8वीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर एक ही चट्टान को काटकर बनाया गया है।

10. बद्रीनाथ मंदिर, उत्तराखंड
यह मंदिर उत्तर भारतीय नागर शैली में बना है और इसका वर्तमान स्वरूप आदि शंकराचार्य द्वारा पुनर्स्थापित माना जाता है।
ये मंदिर भारत की सांस्कृतिक धरोहर के अमूल्य रत्न हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को प्राचीन स्थापत्य और इतिहास से जोड़ते रहेंगे।
