रिपोर्ट – नंद किशोर मंडल, पाकुड़
पाकुड़: जिले के विभिन्न विभागों में ड्राइवर, कंप्यूटर ऑपरेटर और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर राज्य सरकार प्राइवेट प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से मानदेय पर कर्मियों की बहाली कर रही है। तय प्रक्रिया के तहत जिलों से खाली पदों की सूची एजेंसी को भेजी जाती है, जिसके आधार पर योग्य अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाता है। डीसी के निर्देश पर गठित चयन समिति प्रक्रिया पूरी करती है और चयनित कर्मियों को जिला प्रशासन के अधीन कार्यरत किया जाता है।
व्यवस्था कागज़ों पर व्यवस्थित दिखती है, लेकिन जमीनी हालात कई नए सवाल खड़े कर रहे हैं। पाकुड़ सदर, हिरणपुर, लिट्टीपाड़ा, अमड़ापाड़ा, महेशपुर और पाकुड़िया सहित कई प्रखंडों में बड़ी संख्या में ऐसे आउटसोर्सिंग कर्मी कार्यरत हैं जो बीते 10 वर्षों से एक ही प्रखंड कार्यालय में तैनात हैं।
प्रशासनिक नियमों के अनुसार समय-समय पर कर्मियों का स्थानांतरण कार्य-संस्कृति, पारदर्शिता और संतुलन के लिए आवश्यक माना जाता है, लेकिन यहाँ स्थितियाँ इसके उलट दिखाई देती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि तबादला व्यवस्था यहाँ जैसे अपनी ही परिभाषा भूल गई है। जहाँ किसी कर्मी की तैनाती हुई, वह वहीं स्थायी ढांचा बन गया।
यही कारण है कि प्रखंडों में वर्षों से एक ही चेहरे दिखने से चाहे अनौपचारिक मेल-जोल हो या कार्य-सुविधाएँ कई तरह की धारणाएँ और चर्चाएँ भी तेज़ होती रही हैं। कुछ लोग इसे अनुभव का लाभ बताते हैं, तो कुछ इसे सिस्टम की खामोशी और रस्सी-बल का खेल मानते हैं।
महत्वपूर्ण यह है कि छः प्रखंडों वाला जिला होने के बावजूद इतने लंबे समय तक एक ही जगह जमे रहना पारदर्शिता और प्रशासनिक संतुलन दोनों पर सवाल खड़ा करता है।
अब निगाहें जिला प्रशासन पर हैं क्या समीक्षा कर फेरबदल की प्रक्रिया शुरू होगी, या फिर यह मुद्दा भी धीरे-धीरे पुरानी फाइलों की तरह चुपचाप धूल में दब जाएगा?