पाकुड़ विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक अकील अख्तर के ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) में शामिल होने के बाद जिले की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। कांग्रेस कार्यकर्ता मोफिजूल आलम ने अकील अख्तर पर तीखा और करारा हमला बोलते हुए उनके पूरे राजनीतिक चरित्र पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
मोफिजूल आलम ने कहा कि अकील अख्तर ने राजनीति की शुरुआत झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) से की थी, लेकिन पार्टी ने गंभीर कारणों के चलते उन्हें छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया। इसके बाद उन्होंने ऑल झारखंड स्टूडेंट पार्टी का दामन थामा, मगर वहां भी उनकी राजनीतिक यात्रा ज्यादा लंबी नहीं चल सकी।
उन्होंने आगे कहा कि वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अकील अख्तर ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक दिशा बदली और समाजवादी पार्टी (सपा) में शामिल हो गए। सपा के टिकट पर चुनाव लड़ने के बावजूद जनता ने उन्हें नकार दिया और उन्हें करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा।
कांग्रेस कार्यकर्ता ने तीखे शब्दों में तंज कसते हुए कहा, जो नेता बार-बार पार्टी, विचारधारा और मंच बदलता है, वह समाज की सेवा का दावा कैसे कर सकता है? जो खुद किसी एक विचार पर टिक नहीं पाया, वह क्षेत्र और जनता के भविष्य के लिए कैसे भरोसेमंद होगा?
मोफिजूल आलम ने यह भी कहा कि बार-बार दल बदलने से यह साफ हो जाता है कि अकील अख्तर की राजनीति सिद्धांतों पर नहीं, बल्कि अवसरों पर टिकी हुई है।
पूर्व विधायक का AIMIM में शामिल होना जहां उनके समर्थकों द्वारा नई राजनीतिक पारी की शुरुआत बताया जा रहा है, वहीं विपक्ष इसे ‘अवसरवादी राजनीति’ और ‘विश्वासघात की परंपरा’ करार दे रहा है। इस घटनाक्रम ने पाकुड़ की राजनीति में नई दरार पैदा कर दी है और आने वाले दिनों में सियासी बयानबाजी और टकराव और तेज होने के पूरे आसार हैं।