पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति पर मंडराते संकट के बीच भारत ने एक बार फिर रूस से कच्चे तेल की खरीद तेज कर दी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रूस के 1 करोड़ बैरल से अधिक कच्चे तेल की खरीद पहले ही की जा चुकी है और कई टैंकर भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में सौदों की जानकारी रखने वाले सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इस तेल की बड़ी मात्रा संभवतः उस एक महीने की छूट की घोषणा से पहले ही खरीद ली गई थी, जिसकी घोषणा वॉशिंगटन में गुरुवार देर रात की गई थी।

जहाज ट्रैकिंग आंकड़ों के मुताबिक, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में मौजूद टैंकरों पर करीब 1.5 करोड़ बैरल रूसी कच्चा तेल लदा हुआ है। इसके अलावा लगभग 70 लाख बैरल तेल लेकर कुछ जहाज सिंगापुर के पास खड़े हैं, जो एक सप्ताह के भीतर भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच सकते हैं। भूमध्य सागर और स्वेज नहर क्षेत्र से भी रूसी तेल से भरे कई टैंकर भारतीय उपमहाद्वीप की ओर बढ़ रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी रिफाइनरी कंपनियां मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड जो दिसंबर के बाद से रूसी तेल की खरीद से दूर थीं, अब फिर से बाजार में सक्रिय हो गई हैं। वहीं निजी क्षेत्र की बड़ी रिफाइनिंग कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड भी अपने घरेलू ईंधन उत्पादन संयंत्र के लिए रूसी तेल खरीदने की कोशिश कर रही है। हालांकि कंपनी का निर्यात केंद्रित प्लांट पहले की तरह गैर-रूसी कच्चे तेल का ही उपयोग करेगा।
जानकारी के मुताबिक, रूसी तेल से भरे टैंकरों ने लाइसेंस जारी होने से पहले ही अपने गंतव्य बदलकर भारतीय बंदरगाहों की ओर संकेत देना शुरू कर दिया था। जहाज ट्रैकिंग फर्म केप्लर के अनुसार, यूराल्स ग्रेड का तेल लेकर कम से कम 18 जहाज भारत की ओर जाते दिखाई दे रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में भारत द्वारा रूस से तेल आयात और बढ़ सकता है। डेटा इंटेलिजेंस फर्म के विश्लेषक सुमित रितोलिया ने कहा कि रिफाइनरियां जल्द ही अपनी खरीद बढ़ा सकती हैं और आयात की मात्रा 20 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक तक पहुंच सकती है।

हालांकि बाजार की स्थिति तेजी से बदल रही है। पहले जहां रूसी तेल भारी छूट पर मिल रहा था, वहीं अब भारतीय रिफाइनरियां रूस के प्रमुख यूराल्स ग्रेड तेल के लिए डेटेड ब्रेंट से 2 से 4 डॉलर प्रति बैरल अधिक कीमत देने को तैयार हैं। पिछले महीने यह तेल ब्रेंट से 15 से 20 डॉलर प्रति बैरल तक सस्ता मिल रहा था। भारत की खरीद फिर से बढ़ने से रूस से तेल आयात 2024 के मध्य में दर्ज लगभग 20 लाख बैरल प्रतिदिन के स्तर के करीब पहुंच सकता है। केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, पिछले महीने यह आयात घटकर औसतन 10.6 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया था, जो सितंबर 2022 के बाद सबसे कम स्तर था।
इस बीच पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है। 8 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमले में देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद से क्षेत्र में संघर्ष और तेज हो गया है। दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति का प्रमुख मार्ग होर्मुज़ जलडमरूमध्य सुरक्षा कारणों से लगभग बंद हो गया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने इसे पूरी तरह बंद करने की चेतावनी दी है। ईरान की जवाबी कार्रवाइयों के कारण क्षेत्र के कई तेल और गैस क्षेत्र भी अस्थायी रूप से बंद करने पड़े हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों को अमेरिकी नौसेना सुरक्षा प्रदान करेगी। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि जमीन पर यह व्यवस्था व्यावहारिक नहीं दिखती, क्योंकि क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है और अमेरिकी ठिकानों पर भी हमलों का खतरा बना हुआ है।