रिपोर्ट – नंद किशोर मंडल, पाकुड़
पाकुड़ जिले के सिमलोंग थाना क्षेत्र में इन दिनों हालात ऐसे हैं मानो हाईकोर्ट की रोक कागज़ों में कैद हो गई हो और ज़मीन पर बालू माफिया की बादशाहत चल रही हो। दिन के उजाले में एक नहीं, दो नहीं—दर्जनों ट्रैक्टर बालू लादे ऐसे गुजरते हैं जैसे उन्हें किसी का डर ही न हो। कहते हैं कानून के हाथ लंबे होते हैं लेकिन सिमलोंग में तो कानून की आंखों पर पट्टी बंधी दिखती है। पुलिस की नाक के नीचे से बालू की गाड़ियां रेंगती नहीं, सीना ठोक कर निकलती हैं, मगर थानेदार साहब को न खनन दिखता है, न परिवहन सब कुछ मोर बनकर नाच रहा है। हाईकोर्ट ने साफ-साफ बालू खनन पर रोक लगाई है, लेकिन यहां का प्रशासन मानो कह रहा हो कोर्ट अपनी जगह, हमारा खेल अपनी जगह! नतीजा यह कि HC की रोक को ठेंगा दिखाकर इलाके में अवैध खनन और परिवहन धड़ल्ले से जारी है।
आज सिमलोंग में सवाल सिर्फ बालू का नहीं, कानून की साख का है। जब हुक्मरान खामोश हों, रखवाले बेख़बर हों और माफिया बेख़ौफ, तो समझ लीजि यहाँ नियम नहीं, रेत की रानीत चल रही है।
अब देखना यह है कि प्रशासन कब नींद से जागता है या फिर हाईकोर्ट की रोक यूं ही ट्रैक्टरों के टायरों तले कुचली जाती रहेगी।