भाकपा माले ने आरोप लगाया है कि पुलिस हिंसा और हाजत में हो रही मारपीट व हत्याओं के मामलों पर सवाल न उठें, इसके लिए पलामू पुलिस आंदोलनकारियों को डराने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने कहा कि 29 अगस्त को हजारों लोग मेदिनीनगर की सड़कों पर पुलिस हिंसा के विरोध में उतरे थे और जिस तरह सभा को जनसमर्थन मिला, वह स्पष्ट करता है कि लोग पुलिस के रवैये से नाराज हैं।
द मॉर्निंग प्रेस को जानकारी देते हुए दिव्या भगत ने बताया कि पुलिस ने कार्यक्रम की सूचना पहले ही मेदिनीनगर सदर एसडीओ को दे दी थी, इसके बावजूद आंदोलन के बाद प्रदर्शनकारियों पर मुकदमे किए जा रहे हैं। इस दौरान रेहला और छतरपुर के लोगों ने भी नए मामलों को सामने रखा, जिनमें रामदास भुइयां के साथ पुलिस द्वारा मारपीट की घटना शामिल है।
पार्टी ने आरोप लगाया कि “वकीलों के साथ मारपीट, दलितों के साथ मारपीट, हाजत में हत्या और बालू के नाम पर कमीशनखोरी” अब पलामू पुलिस की पहचान बन चुकी है। माले ने साफ कहा कि वे भगत सिंह के आदर्शों को मानने वाले हैं और झूठे मुकदमों से डरने वाले नहीं।
भाकपा माले ने चेतावनी दी कि जब तक पुलिस, बाबासाहेब के संविधान के अनुरूप आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों का सम्मान नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। साथ ही सरकार को यह तय करना होगा कि झारखंड में “अबुआ दिसुम अबुआ राज” के सपनों वाला जनतांत्रिक शासन चलेगा या पुलिसिया राज।