रिपोर्ट:नंद किशोर मंडल|पाकुड़
हिरणपुर प्रखंड के बड़तल्ला गांव में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण (SBMG) के तहत दो शौचालय का निर्माण हो रहा है, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता और लागत ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार शौचालय निर्माण में निम्न गुणवत्ता वाली सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है, जिसमें घटिया किस्म की 3 नंबर ईंट, नॉन-ब्रांड टाइल्स और पतली टिन की चादर शामिल हैं।
शौचालय निर्माण में कोई सूचना पट्ट (नोटिस बोर्ड) भी नहीं लगाया गया है, जो नियमों के अनुसार अनिवार्य है। आश्चर्यजनक बात यह है कि एक शौचालय का अनुमानित खर्च लगभग 6 लाख रुपए बताया जा रहा है, जबकि इसमें प्रयुक्त सामग्री की गुणवत्ता और आकार देखते हुए यह लागत अत्यधिक प्रतीत होती है।
विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है कि झारखंड सरकार की अबुआ आवास योजना के तहत गरीब परिवारों को तीन कमरे के घर के लिए केवल 2 लाख रुपए प्रदान किए जाते हैं। इसका अर्थ है कि एक ही शौचालय के निर्माण में तीन परिवारों के घर बनाने के बराबर राशि खर्च की जा रही है।
स्थानीय लोग इस बात पर आश्चर्य जताते हैं कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद शौचालय का निर्माण घटिया सामग्री से किया जा रहा है। इससे साफ संकेत मिलता है कि निर्माण प्रक्रिया में भारी भ्रष्टाचार और अनियमितताएँ शामिल हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि इसी तरह की अनियमितताएँ जारी रहीं, तो सरकार की महत्वकांक्षी योजनाओं का लाभ गरीब और जरूरतमंद वर्ग तक सही रूप में नहीं पहुंचेगा। हालांकि इस सम्बन्ध में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता से हमने फ़ोन कर सम्पर्क करने का प्रयास किया परन्तु कोई जवाब नहीं मिल सका।