गुमला जिले के चैनपुर–डुमरी सीमावर्ती क्षेत्र में टाटी– नवगई नदी पर दो करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बना हाई लेवल पुल एक वर्ष भी नहीं टिक सका और ध्वस्त हो गया। बताया जा रहा है कि पुल से एक चिप्स लदा हाइवा गुजर रहा था, तभी पुल के दो स्पैन अचानक ढह गए।
यह पुल विशेष प्रमंडल, गुमला द्वारा बनवाया गया था और इसका निर्माण अल्टीमा कंपनी द्वारा किया गया था। विभागीय सूत्रों के अनुसार, निर्माण के दौरान ही पुल की गुणवत्ता को लेकर कंपनी को आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं, लेकिन कंपनी ने विभागीय चेतावनियों को नजरअंदाज करते हुए पुल की ढलाई कर दी। इसका नतीजा यह हुआ कि करीब 15 दिन पहले ही पुल ध्वस्त हो गया।
घटना के बाद पूरे मामले को दबाने का प्रयास किए जाने के भी आरोप लगाए जा रहे हैं। पुल के ध्वस्त होने की सूचना मिलते ही टाटी और नवगई गांव के ग्रामीण बड़ी संख्या में नदी किनारे पहुंचे। ग्रामीणों ने घटिया निर्माण सामग्री और लापरवाही को पुल ध्वस्त होने का मुख्य कारण बताया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल की क्षमता के अनुरूप भारी वाहनों के आवागमन पर कोई रोक नहीं लगाई गई थी, जिसके कारण चिप्स लदे हाइवा का दबाव पुल सहन नहीं कर सका और वह ढह गया। इस घटना के बाद निर्माण एजेंसी और संबंधित विभाग की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।